Orgasmic Headache Top Sexologist Patna Bihar Dr Sunil Dubey
अगर आप एक शादीशुदा व्यक्ति है, और ऑर्गेज्मिक सिरदर्द के कारण अपनी यौन जीवन में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, तो वास्तव में, यह चिंता का विषय है? वास्तव में, ऑर्गेज्मिक सिरदर्द—जिसे 'यौन सिरदर्द' भी कहा जाता है—एक प्रकार का ऐसा दर्द है जो किसी व्यक्ति के यौन गतिविधि के दौरान होता है, विशेष रूप से ऑर्गेज्म (चरम सुख) से ठीक पहले या ठीक उसी क्षण होता है। इस यौन समस्या के कारण, व्यक्ति (पुरुष या महिला) को अपने यौन जीवन में बहुत सारे कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, इस यौन समस्या के कारण पुरुष अपने स्खलन के समय से जूझता है, जबकि महिलाओं को यौन पीड़ा या वैजिनल के सूखापन से जूझना पड़ता है।
विश्व-प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुनील दुबे—जो पटना के अग्रणी सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर में से एक हैं—वह बताते हैं कि 'ऑर्गेस्मिक सिरदर्द' (orgasmic headache) एक ऐसी स्थिति है जो यौन प्रतिक्रिया चक्र के तीसरे चरण से जुड़ी होती है। तीसरा चरण, व्यक्ति के ओर्गास्म (चरमसुख) से जुड़ा होता, इस समस्या के कारण प्रभावित होता है। मूलतः, वे एक लाइसेंस्ड आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं, और सेक्सोलोजी के पेशे में विशेषज्ञ है, वे 'दुबे क्लिनिक' में नित्य दिन अभ्यास करते हैं, जहाँ वे विवाहित और अविवाहित व्यक्तियों में होने वाले यौन स्वास्थ्य से संबंधित सभी समस्याओं का इलाज करते हैं। इस सीनियर सेक्सोलॉजिस्ट की एक खास विशेषता यह है कि वे आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजी के क्षेत्र में एक प्रामाणिक शोधकर्ता भी हैं, जिन्होंने अपने समस्त कैरियर में बहुत सारे गुप्त व यौन समस्या पर अपना सफल शोध भी किया है। ऑर्गेस्मिक सिरदर्द के संबंध में, उनका मानना हैं कि इसके दो मुख्य पैटर्न होते हैं जिनके ज़रिए इस यौन स्थिति के प्रभाव व्यक्ति में अलग-अलग तरीकों से उनके यौन जीवन में सामने आते हैं:
- हल्के दर्द वाला प्रकार – इसकी शुरुआत सिर या गर्दन में हल्के दर्द के रूप में होती है, जो यौन उत्तेजना बढ़ने के साथ-साथ और तेज़ होता जाता है। यौन क्रिया के दौरान, यह दर्द ऑर्गैस्मिक सिरदर्द के रूप में सामने आता है।
- अचानक और तेज़ दर्द वाला प्रकार – यह अचानक होने वाला, बहुत तेज़ सिरदर्द है जो ऑर्गेज़्म से ठीक पहले या उसके दौरान होता है। यह सिरदर्द व्यक्ति में "बिजली कड़कने" जैसा महसूस हो सकता है।
ऑर्गेज्म सिरदर्द क्यों होता है?
हमारे सीनियर आयुर्वेदिक सेक्सोलोजी एक्सपर्ट, डॉ. सुनील दुबे बताते हैं कि वास्तव में, इसका सटीक कारण हमेशा स्पष्ट नहीं होता है, लेकिन यह अक्सर निम्नलिखित कारकों से जुड़ा होता है, जिसकी पहचान निदान के समय किया जाता है।
- रक्तचाप में अचानक वृद्धि का होना।
- सिर और गर्दन की मांसपेशियों में तनाव का होना।
- यौन क्रिया के दौरान रक्त वाहिकाओं के व्यवहार में बदलाव होना।
क्या ऑर्गेज्म सिरदर्द व्यक्ति के लिए खतरनाक होता है?
डॉ. दुबे अपने व्यावहारिक ज्ञान और नैदानिक अनुभव के आधार पर बताते है कि वास्तव में, यह शारीरिक समस्या के कारण होने वाला समस्या है। अधिकांश मामलों में, ऑर्गेज्मिक सिरदर्द हानिरहित होते हैं, खासकर यदि:
- वे कभी-कभार होते हैं,
- दर्द कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों के भीतर ठीक हो जाता है।
हालाँकि, इसके कुछ दुर्लभ मामलों में, वे गंभीर स्थितियों से जुड़े हो सकते हैं, जैसे:
- सबएराक्नॉइड हेमरेज: जैसा कि स्ट्रोक का एक जानलेवा और अक्सर घातक प्रकार में से एक है, जो दिमाग के चारों ओर की जगह में खून बहने के कारण होता है—आमतौर पर किसी एन्यूरिज्म (रक्त वाहिका में सूजन) के फटने की वजह से। यह एक गंभीर स्थिति होती है और व्यक्ति को तात्कालिक मेडिकल सहायता की आवश्यकता होती है।
- ब्रेन एन्यूरिज्म: यह दिमाग के अंदर की किसी धमनी की दीवार में एक कमजोर और उभरा हुआ हिस्सा होता है—जो अक्सर किसी बेरी जैसा दिखता है—और जिसमें खून भर जाता है। यह किसी भी व्यक्ति के लिए एक दुर्लभ स्थिति है।
सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर से कब मिलें:
यदि किसी व्यक्ति को नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण महसूस होता है, तो उसे तुरंत डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए, जिससे इसकी पहचान व निदान हो सके:
- यदि व्यक्ति को इस तरह का सिरदर्द पहली बार हो रहा है,
- यदि दर्द अचानक और बहुत ज़्यादा तेज़ हो (“आपकी ज़िंदगी का सबसे बुरा सिरदर्द”)
- यदि व्यक्ति को इसके साथ-साथ अन्य लक्षण भी महसूस हों, जैसे: उल्टी, देखने में दिक्कत, कमज़ोरी या सुन्नपन, और भ्रम या भटकाव आदि।
ऑर्गेज्म से होने वाले सिरदर्द के बारे में व्यावहारिक जानकारी:
हमारे आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजी विशेषज्ञ, डॉ. सुनील दुबे—जो बिहार के जाने-माने सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर में से एक हैं—बताते हैं कि हालाँकि इस खास तरह की यौन समस्या वाले मरीज़ अक्सर कम ही देखने को मिलते हैं, फिर भी कुछ शादीशुदा जोड़े सचमुच इस समस्या की शिकायत करते हैं। असल में, इस तरह का दर्द पूरी तरह से वास्तविक होता है! इसे 'ऑर्गेस्मिक सिरदर्द', 'बेनाइन इंटरकोर्स सिरदर्द' या 'बेनाइन कोइटस सिरदर्द' भी कहा जाता है। इस तरह का सिरदर्द यौन संबंध बनाने, हस्तमैथुन करने और अन्य तरह की यौन गतिविधियों के दौरान हो सकता है। यह मुख्य रूप से ज्यादातर पुरुषों को प्रभावित करता है, हालाँकि कुछ महिलाएँ भी इसकी चपेट में आ सकती हैं।
कुछ पुरुषों का कहना है कि जैसे ही वे ऑर्गेज्म (चरम-सुख) के करीब पहुँचते हैं, उन्हें अचानक—और कभी-कभी बहुत तेज़—यौन से जुड़ा सिरदर्द होने लगता है; यह दर्द धीरे-धीरे बढ़ता जाता है और ठीक ऑर्गेज्म के क्षण में अपने चरम पर पहुँच जाता है। अक्सर, यह दर्द केवल कुछ मिनटों तक ही रहता है; हालाँकि, कुछ मामलों में यह कई घंटों या यहाँ तक कि कई दिनों तक भी बना रह सकता है। जिन लोगों को माइग्रेन की समस्या होती है, उन्हें यौन क्रिया से जुड़े सिरदर्द का अनुभव होने का जोखिम अधिक होता है। इस समस्या में, अच्छे जीवनशैली का होना अतिआवश्यक है।
हालांकि इस समस्या के लक्षण काफी परेशान करने वाले हो सकते हैं, लेकिन आम तौर पर यह कोई गंभीर या "खराब" स्थिति नहीं होती। अगर किसी व्यक्ति को उसके यौन गतिविधि के दौरान सिरदर्द होता है, तो उसे निश्चित रूप से किसी ऐसे सेक्सोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए जिस पर आपको भरोसा हो साथ-ही-साथ उसे सेक्सोलोजी चिकित्सा में अच्छी पकड़ हो। इससे डॉक्टर किसी भी अंदरूनी चिकित्सीय कारण—जैसे कि सिर के अंदर रक्तस्राव—की संभावना को खारिज कर पाते हैं। अगर ऐसी किसी संभावना का ज़रा भी शक होता है, तो वे व्यक्ति को MRI (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग), CT स्कैन या एंजियोग्राफी की सलाह दे सकते है; हालांकि, अक्सर यह दर्द थोड़े ही समय में अपने आप ठीक हो जाता है।
यौन क्रिया के दौरान सिरदर्द (ओर्गास्म दर्द) की रोकथाम:
भारत में, कुछ सीनियर सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर्स यौन गतिविधि के दौरान होने वाले सिरदर्द को रोकने के लिए दवाएँ भी लिखते हैं। उदाहरण के लिए, इनमें बीटा-ब्लॉकर्स शामिल हो सकते हैं, जिनका उपयोग आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर, ग्लूकोमा या माइग्रेन के इलाज के लिए किया जाता है। हालाँकि, कुछ दर्द निवारक दवाएँ भी हैं जिन्हें यौन गतिविधि से लगभग एक घंटा पहले लिया जा सकता है; इस श्रेणी में एंटी-इंफ्लेमेटरी या एंटी-माइग्रेन दवाएँ शामिल हैं। सिरदर्द से बचने का एक गैर-औषधीय तरीका यह है कि जैसे ही सिरदर्द शुरू हो, यौन गतिविधि को तुरंत रोक दिया जाए। इसके अलावा, प्रभावित व्यक्ति यौन गतिविधि के दौरान अधिक निष्क्रिय भूमिका निभाने का विकल्प भी चुन सकते हैं। यौन गतिविधि से पहले सिर और गर्दन की मांसपेशियों की मालिश करना भी किसी भी तनाव को कम करने में फायदेमंद हो सकता है। वास्तव में, यह रोकथाम की आधुनिक तकनीक है।
ऑर्गेज्मिक सिरदर्द के उपचार में आयुर्वेद की भूमिका व महत्व:
आयुर्वेद में, संभोग के दौरान होने वाले सिरदर्द का वर्णन आमतौर पर इस विशिष्ट आधुनिक शब्द का उपयोग करके नहीं किया जाता; हालाँकि, इन्हें शरीर के दोषों—विशेष रूप से वात और पित्त—में असंतुलन के रूप में समझा जा सकता है। चुकि, आयुर्वेद मनाता है कि शरीर को स्वस्थ रखने में उनके ऊर्जाओं का संतुलन होना अति आवश्यक है, जिसमे वात, पित्त, व कफ मुख्य रूप से जुड़े होते है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण:
- वात असंतुलन: इसका संबंध अचानक होने वाले, तेज़ और धड़कन वाले दर्द से होता है (जैसे कि ऑर्गेज़्म के दौरान होने वाला तेज़ सिरदर्द) ।
- पित्त असंतुलन: इसका संबंध यौन उत्तेजना के दौरान गर्मी, तीव्रता और बढ़े हुए रक्तचाप की अनुभूति से होता है।
- ओजस (जीवन-शक्ति) का अत्यधिक क्षय या अनुचित यौन क्रियाएँ भी इस स्थिति में योगदान दे सकती हैं। इस स्थिति को नियंत्रित करने के आयुर्वेदिक उपायों में शामिल हैं:
वात और पित्त को शांत करना (घरेलु उपाय):
- तंत्रिका तंत्र को स्थिर करने और शरीर की गर्मी को कम करने पर ध्यान दें।
- भोजन का समय नियमित रखें, पर्याप्त नींद लें और अत्यधिक शारीरिक मेहनत से बचें।
- ठंडी तासीर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें: नारियल पानी, दूध और घी।
- मसालेदार, तैलीय और बहुत गर्म भोजन से बचें (जो पित्त को बढ़ाते हैं) ।
हर्बल सहायता (विशेषज्ञ की सलाह पर):
आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियाँ निम्नलिखित है, जिसे किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ व सेक्सोलॉजिस्ट की देखरेख में करना ज्यादा फायदेमंद होता है।
- अश्वगंधा: आयुर्वेद में, इसे जड़ी-बूटी का राजा माना जाता है जो तनाव को कम करती है और तंत्रिका तंत्र को सहारा देती है।
- ब्राह्मी: यह दिमाग के काम करने की क्षमता को बेहतर बनाती है और मन को शांत रखने में मदद करती है।
- शंखपुष्पी: यह मानसिक बेचैनी कम करने में मदद करती है ताकि मानसिक शांति को बढ़ावा मिल सके।
- जटामांसी: इसका उपयोग व्यक्ति को शांति और शीतलता का एहसास कराती है।
अभ्यंग (तेल की मालिश):
व्यक्ति को रोज़ाना या नियमित रूप से गर्म तेल (जैसे तिल या नारियल का तेल) से खुद की मालिश करना, उसके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है:
- यह गर्दन और सिर की मांसपेशियों को आराम देता है।
- यह वात दोष में असंतुलन को कम करता है।
- साथ ही, यह रक्त संचार में सुधार करता है।
तनाव और साँस पर नियंत्रण का अभ्यास:
चूँकि इसमें तनाव की अहम भूमिका होती है, अतः तनाव और साँस पर नियंत्रण का अभ्यास करना, व्यक्ति को मानसिक संतुलन प्रदान करने में मददगार होता है।
- प्राणायाम (साँस लेने की तकनीकें, जैसे अनुलोम-विलोम) का अभ्यास करें।
- हल्के-फुल्के योगासन करें।
- तंत्रिका तंत्र की अत्यधिक सक्रियता को कम करने के लिए ध्यान का अभ्यास करें।
यौन गतिविधि में संयम व संतुलन:
आयुर्वेद, भारत चिकित्सा की पारंपरिक व प्राकृतिक पद्धति, हमेशा इस बात पर ज़ोर देता है कि संयम, संतुलन, व अच्छी जीवनशैली एक स्वस्थ जीवन जीने ली प्रेरणा देता है। इसका मुख्य पहलु यौन गतिविधि में संयम व संतुलन से हमेशा जुड़ा होता है। कुछ आयुर्वेदिक युक्तियाँ है, जो फायदेमंद है -
- अत्यधिक या बहुत ज़ोरदार यौन गतिविधि से बचना
- अचानक ज़ोर लगाने के बजाय शांत और तनाव-मुक्त स्थिति बनाए रखना
- अचानक तेज़ी लाने के बजाय धीरे-धीरे आगे बढ़ना
डॉ. दुबे बताते है कि उपचार का समग्र दृष्टिकोण (आधुनिक व आयुर्वेदिक) किसी भी समस्या के निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वे आगे बताते है कि आयुर्वेदिक उपचार के दौरान, व्यक्ति को आधुनिक चिकित्सा के लिए भी तैयार रहना चाहिए जब व्यक्ति को कुछ चेतावनी भरे संकेतों का सामना करना पड़ता हो।
- अचानक और तेज़ सिरदर्द होना, जो पहली बार हुआ हो।
- ऐसा सिरदर्द जिसे "आपकी ज़िंदगी का सबसे बुरा सिरदर्द" बताया गया हो।
- न्यूरोलॉजिकल लक्षण (तंत्रिका तंत्र से जुड़े लक्षण)
ऊपर बताए गए लक्षण सबएराक्नॉइड हेमरेज जैसी गंभीर स्थितियों का संकेत हो सकते हैं, और इनके लिए तत्काल चिकित्सकीय जांच की आवश्यकता होती है।
संक्षेप में,
डॉ. सुनील दुबे लोगो को हमेशा यह सलाह देते है कि जिन व्यक्तियों को यौन स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी समस्या है, उन्हें इलाज के इस प्राकृतिक तरीके के साथ-साथ समग्र चिकित्सा पर हमेशा भरोसा करना चाहिए। यह तरीका केवल लक्षणों का इलाज करने के बजाय, समस्या के मूल कारण को दूर करने पर ज़ोर देता है। आधुनिक तरीका साक्ष्य को सामने लाने में मदद करता है जबकि आयुर्वेद निम्नलिखित तरीकों से सहायता प्रदान कर सकता है:
- तनाव और तंत्रिका तंत्र पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव को कम करके
- वात और पित्त को संतुलित करके
- समग्र शारीरिक और मानसिक सहनशक्ति में सुधार करके
वे लोगो से यह आग्रह करते है कि आयुर्वेदिक उपचारों से परिणाम मिलने में समय लगता है; इसलिए, उपचार के दौरान यौन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में धैर्य और निरंतरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक होता है। यह तरीका बार-बार होने वाली और जानलेवा न होने वाली बीमारियों के लिए सबसे अधिक प्रभावी होता है, क्योंकि यह उपचार के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करता है। वे दुबे क्लिनिक में सभी प्रकार के गुप्त व यौन रोगियों का उपचार आधुनिक आयुर्वेद के समग्र दृष्टिकोण के माध्यम से करते है जिसमे रोगी को प्रभावपूर्ण व्यक्तिगत उपचार मिलता है। अगर आप दुबे क्लिनिक से जुड़ना चाहते है तो हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करे और अपना अपॉइंटमेंट बुक करे।
!!!अधिक जानकारी के लिए, हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें!!!
डॉ. सुनील दुबे (दुबे क्लिनिक)
B.A.M.S (रांची), M.R.S.H (लंदन), आयुर्वेद में PhD (USA)
पटना, बिहार (भारत) में एक प्रामाणिक आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजी क्लिनिक
!!!हेल्पलाइन नंबर: +91 98350-92586!!!
वेन्यू: दुबे मार्केट, लंगर टोली चौराहा, पटना-04
क्लिनिक का समय: सुबह 08:00 बजे से रात 08:00 बजे तक (प्रतिदिन)




Comments
Post a Comment