Ayurvedic Sexologist in Patna Intimacy Problems Dr Sunil Dubey
Intimacy Problems and Solutions for Couples: Best Ayurvedic Sexologist
in Patna, Bihar India Dr. Sunil Dubey offering his comprehensive treatment to male and female @dubeyclinic
क्या आप अंतरंगता की समस्याओं के कारण अपने वैवाहिक जीवन में संघर्ष कर रहे हैं? यह उन सभी जोड़ों के लिए वाकई एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है जो इसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। वास्तव में, कपल थेरपी और यौन परामर्श के माध्यम से इस तरह के यौन समस्या का निदान जाता है। विश्व-प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुनील दुबे, जो पटना के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर भी है, बताते है कि भारत में एक बहुत बड़ी आबादी (शादी-शुदा जोड़े) अंतरंगता के इस समस्या से अपने जीवन में संघर्ष कर रहे है।
डॉ. सुनील दुबे और दुबे क्लिनिक की विशेषज्ञ टीम एक लम्बे समय से उन सभी लोगों की मदद कर रही है जो किसी भी प्रकार की यौन समस्याओं के कारण अपने व्यक्तिगत या विवाहित जीवन से जूझ रहे हैं। वे भारत के टॉप-रैंक क्लिनिकल सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर में से एक है जो पुरुष और महिला में होने वाले समस्त यौन समस्याओं पर अपना सफल शोध भी किया है। उन्होंने शादी-शुदा जोड़ों में अंतरंगता के समस्या पर अपनी थीसिस भी दिया है। आज का यह जानकारी उनके शोध-प्रबंध से लिया गया है जिसमे उन्होंने इसका जिक्र किया है। कपल थेरेपी व यौन चिकित्सा के माध्यम से वे जोड़े में होने वाले यौन समस्या का उपचार प्रदान करते है। आज का यह सत्र इसी विषय पर आधारित है।
जोड़ों में अंतरंगता की समस्याएँ क्या हैं?
डॉ. दुबे बताते है कि जोड़ों में अंतरंगता की समस्याएँ एक गहरा संबंध-मुद्दा और निकटता स्थापित करने या बनाए रखने में आने वाली कठिनाइयों को दर्शाती हैं। यह रिश्ते के कई पहलुओं को शामिल करती है, जो जोड़े के बीच शारीरिक स्पर्श से कहीं आगे तक जाती है। जब कभी भी जोड़े के बीच अंतरंगता की कमी होती है, तो साथी साथ रहते हुए भी अकेलापन, दूरी या एक-दूसरे के प्रति गलतफहमी महसूस कर सकते हैं।
अंतरंगता के प्रकार:
आमतौर पर, अंतरंगता बहुआयामी होती है, और जोड़े के बीच इनमें से एक या अधिक क्षेत्रों में समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। विभिन्न प्रकारों को समझने से समस्या की जड़ को समझने में मदद मिलती है।
- भावनात्मक अंतरंगता: यह व्यक्ति के अंतरतम विचारों, भावनाओं, आशाओं और आशंकाओं को अपने साथी के साथ साझा करने और समझे जाने व समर्थित महसूस करने की क्षमता है। भावनात्मक अंतरंगता की कमी होने पर, व्यक्ति को खुलकर बोलने में कठिनाई, भावनात्मक बातचीत से बचना, या बात करते समय भी अलग-थलग महसूस करना जैसी स्थिति को दर्शाता है।
- शारीरिक अंतरंगता: इसमें जोड़े के बीच साझा शारीरिक स्नेह शामिल है, जिसमें गले लगाना, चुंबन और हाथ पकड़ना जैसे गैर-यौन स्पर्श, साथ ही यौन गतिविधियाँ शामिल होती हैं। इसमें समस्याएँ शारीरिक स्नेह की कमी, बेमेल यौन इच्छाओं या शारीरिक संपर्क के डर के रूप में प्रकट होती हैं।
- बौद्धिक अंतरंगता: यह विचारों, मतों और बौद्धिक गतिविधियों के आदान-प्रदान पर आधारित एक रिश्ता है। जोड़े के बीच बौद्धिक अंतरंगता की कमी तब देखी जा सकती है जब साथी सार्थक बातचीत में शामिल नहीं होते, उनकी रुचियाँ अलग-अलग होती हैं, या वे कठिन विषयों पर चर्चा करने से बचते हैं।
- आध्यात्मिक अंतरंगता: यह साझा विश्वासों, मूल्यों या आध्यात्मिक प्रथाओं के माध्यम से बनने वाले बंधन को संदर्भित करता है। समस्याएँ विभिन्न धार्मिक मान्यताओं या गहरे, अधिक गहन स्तर पर जुड़ाव की कमी से उत्पन्न हो सकती हैं।
सामान्य कारण और संकेत:
सही मायने में देखा जाय तो, जोड़े के बीच अंतरंगता संबंधी समस्याएं अक्सर व्यक्तिगत और संबंधगत कारकों के संयोजन से उत्पन्न होती हैं। जिसके सामान्य कारण और संकेत निम्नलिखित है:
कारण:
- संवाद का टूटना: जोड़े के बीच अप्रभावी संवाद इसका एक प्रमुख कारण है। जब साथी अपनी ज़रूरतों को व्यक्त करने या बिना किसी निर्णय के अपनी बात कहने में संघर्ष करते हैं, तो इससे ग़लतफ़हमी और नाराज़गी पैदा होती है।
- विश्वास की समस्याएँ: अतीत में हुआ विश्वासघात, बेवफ़ाई, या अस्थिर रिश्तों का इतिहास एक या दोनों साथियों के लिए विश्वास करना मुश्किल बना सकता है, जिससे भावनात्मक दीवारें खड़ी हो सकती हैं।
- तनाव और जीवन में बदलाव: जीवन में बड़े बदलाव, जैसे बच्चे का जन्म, नई नौकरी, आर्थिक तंगी या दुःख, एक करीबी रिश्ते को बनाए रखने के लिए आवश्यक भावनात्मक ऊर्जा को कम कर सकते हैं।
- व्यक्तिगत मानसिक स्वास्थ्य: व्यक्तिगत समस्याएँ, जैसे कम आत्मसम्मान, लगाव की चिंता, या अतीत का आघात, भेद्यता के डर और साथी के करीब आने की अनिच्छा का कारण बन सकते हैं।
- बेमेल ज़रूरतें: अंतरंगता के लिए साथियों की ज़रूरत या इच्छा अलग-अलग हो सकती है, जिससे एक व्यक्ति को अस्वीकारा हुआ और दूसरे को दबाव महसूस हो सकता है।
संकेत:
- अलग-थलग महसूस करना: एक या दोनों साथी एक ही घर में रहते हुए अजनबी जैसा महसूस करते हैं।
- परहेज़: गहरी या भावनात्मक बातचीत, संघर्ष या शारीरिक स्पर्श से बचना।
- नाराज़गी: अतीत के दुखों या शिकायतों को पकड़े रहना जिनका समाधान नहीं हुआ है।
- स्नेह की कमी: यौन और गैर-यौन शारीरिक स्नेह, दोनों में उल्लेखनीय कमी।
- आलोचना: एक-दूसरे के प्रति बढ़ती आलोचना या धैर्य और मान्यता की कमी।
जोड़ों में अंतरंगता संबंधी समस्याओं पर आयुर्वेद का दृष्टिकोण:
जैसा कि हम सभी जानते है कि आयुर्वेद, प्राचीन भारतीय चिकित्सा की पद्धति है, यह जोड़े के बीच अंतरंगता की समस्याओं को समग्र रूप से देखता है और उन्हें न केवल भौतिक शरीर में, बल्कि मन और आत्मा में भी असंतुलन का प्रतिबिंब मानता है। यह यौन स्वास्थ्य को समग्र कल्याण से अलग नहीं करता, बल्कि कई स्तरों पर भागीदारों के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंधों के महत्व पर विशेष ज़ोर देता है।
आयुर्वेद, जोड़ों में अंतरंगता की समस्याओं पर निम्नलिखित प्रकार से विचार करता है:
दोषों (मन-शरीर संरचना) की भूमिका:
आयुर्वेद का केंद्रीय सिद्धांत तीन दोषों की अवधारणा से संबंध रखता है, जिसमे शामिल है- वात, पित्त और कफ। ये जैव-संचारी शक्तियाँ व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विशेषताओं को नियंत्रित करती हैं। जब ये दोष (ऊर्जा) संतुलन में होते हैं, तो व्यक्ति स्वस्थ होता है; जब ये असंतुलित होते हैं, तो इससे कई समस्याएँ हो सकती हैं, जिनमें अंतरंगता को प्रभावित करने वाली समस्याएँ भी शामिल हैं।
- वात (वायु और आकाश): आयुर्वेद के मतानुसार, वात प्रकृति के लोग अक्सर रचनात्मक, उत्साही और संवेदनशील होते हैं। हालाँकि, इसका असंतुलन व्यक्ति में चिंता, भय और अलगाव की भावना पैदा कर सकता है। यह अस्थिर इच्छाओं, निरंतर आश्वासन की आवश्यकता, या अपने साथी के साथ मौजूद न रह पाने की भावना के रूप में प्रकट हो सकता है।
- पित्त (अग्नि और जल): आयुर्वेद का मानना है कि पित्त प्रकृति के लोग भावुक, महत्वाकांक्षी और तीव्र होते हैं। पित्त असंतुलन चिड़चिड़ापन, क्रोध और उच्च अपेक्षाओं को जन्म दे सकता है। किसी रिश्ते में, इसका परिणाम प्रतिस्पर्धा, आलोचना या भावनात्मक कोमलता की कमी हो सकता है, जो अंतरंगता में बाधा डाल सकता है।
- कफ (पृथ्वी और जल): आयुर्वेद कहता है कि कफ प्रकृति के लोग शांत, पोषण करने वाले और स्थिर होते हैं। जब कफ असंतुलित होता है, तो यह सुस्ती, ज़िद और आसक्ति पैदा कर सकता है। इससे सहजता की कमी, संघर्षों में "शीत युद्ध" जैसी गतिशीलता, या भारीपन की एक सामान्य भावना पैदा हो सकती है जो व्यक्ति के उसके जुनून को दबा सकती है।
डॉ. सुनील दुबे अपने शोध व अध्ययन के आधार पर बताते है कि आयुर्वेद का यह मत है कि अपने और अपने साथी के दोषों को समझना रिश्ते में संचार और करुणा को बेहतर बनाने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है। अतः किसी भी शादी-शुदा जोड़े को अंतरंगता को लॉक या अनलॉक करने में आयुर्वेद के समस्त दृष्टिकोण को अपनाना उसके समस्त स्वास्थ्य का बेहतरी का संकेत देते है।
ओजस: (जीवन शक्ति और जुड़ाव का सार)
- आयुर्वेद चिकित्सा व उपचार में, यौन ऊर्जा और जीवन शक्ति का सीधा संबंध ओजस की अवधारणा से है। ओजस शरीर के ऊतकों का सबसे सूक्ष्म और सूक्ष्मतम सार में से एक है। इसे हमारी शक्ति, रोग प्रतिरोधक क्षमता, मानसिक स्पष्टता और सबसे महत्वपूर्ण, दूसरों के साथ गहराई से जुड़ने की व्यक्ति की क्षमता का स्रोत माना जाता है।
- जब शरीर में ओजस प्रबल होता है, तो व्यक्ति में स्वस्थ कामेच्छा, स्पष्ट मन और संतुष्टि की भावना होती है। अंतरंगता को इस महत्वपूर्ण ऊर्जा को व्यक्त करने और पोषित करने के एक तरीके के रूप में देखा जाता है। इसके विपरीत, ओजस की कमी—जो अक्सर तनाव, खराब आहार, नींद की कमी या अत्यधिक यौन गतिविधि के कारण होती है—कम कामेच्छा, थकान और भावनात्मक और शारीरिक खालीपन की भावना पैदा करती है।
उपचार के लिए एक समग्र दृष्टिकोण:
किसी जोड़े के बीच अंतरंगता संबंधी समस्याओं के आयुर्वेदिक उपचार केवल शारीरिक लक्षणों को दूर करने से कहीं आगे तक ले जाते हैं। ये उपचार पूरे व्यक्ति और समग्र रूप से रिश्ते में संतुलन बहाल करने पर केंद्रित होते हैं। इसके प्रमुख उपचार विधियों में शामिल हैं:
- आहार और जीवनशैली: संतुलित आहार किसी भी व्यक्ति के लिए आवश्यक है। आयुर्वेद ऐसे खाद्य पदार्थों की सलाह देता है जो शरीर और मन को पोषण देते हैं, जैसे ताज़े फल, सब्ज़ियाँ, मेवे और घी जैसी स्वास्थ्यवर्धक वसा। यह व्यक्ति को उन खाद्य पदार्थों से भी परहेज़ करने की सलाह देता है जो शरीर में असंतुलन पैदा कर सकते हैं, जैसे अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, कैफीन या शराब।
- हर्बल उपचार (रस-रसायन): आयुर्वेदिक रसायन नामक विशिष्ट जड़ी-बूटियों का उपयोग शरीर और मन को तरोताज़ा करने के लिए किया जाता है। अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियाँ व्यक्ति में उसके तनाव और चिंता को कम करने और प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार करने की अपनी क्षमता के लिए जानी जाती हैं। शतावरी का उपयोग अक्सर महिलाओं में जीवन शक्ति और हार्मोनल संतुलन बढ़ाने के लिए किया जाता है। इनका उपयोग अक्सर किसी आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजिस्ट चिकित्सक के मार्गदर्शन में एक व्यक्तिगत उपचार योजना के हिस्से के रूप में किया जाता है।
- योग और ध्यान: किसी भी व्यक्ति को अपने मन और शरीर को शांत करने वाले अभ्यास का करना आवश्यक हैं। योग आसन रक्त प्रवाह और जीवन शक्ति में सुधार कर सकते हैं, जबकि श्वास व्यायाम (प्राणायाम) और ध्यान तनाव को कम कर सकते हैं और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ा सकते हैं।
- चिकित्सा (पंचकर्म): कुछ मामलों में, शरीर से विषाक्त पदार्थों (अमा) को निकालने के लिए पंचकर्म जैसी विषहरण चिकित्सा की सलाह दी जा सकती है, जो स्वास्थ्य समस्याओं का मूल कारण हो सकते हैं, जिनमें अंतरंगता को प्रभावित करने वाली समस्याएं भी शामिल हैं।
- संचार और सचेतनता: आयुर्वेद खुले संचार और भावनात्मक कल्याण पर भी विशेष ज़ोर देता है। यह जोड़ों को एक सहयोगी और प्रेमपूर्ण वातावरण बनाने, कृतज्ञता का अभ्यास करने और अपने रिश्ते को गहरा करने के लिए साथ में गुणवत्तापूर्ण समय बिताने को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित करता है।
डॉ. सुनील दुबे शादी-शुदा जोड़ों में अंतरंगता की समस्याओं से निपटने में कैसे मदद करते हैं?
डॉ. सुनील दुबे एक प्रामाणिक आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर हैं जो पिछले साढ़े तीन दशकों से बिहार के सर्वश्रेष्ठ क्लिनिकल सेक्सोलॉजिस्ट में से एक रहे है। वे अपने गुणवत्तापूर्ण व सिद्ध उपचार में जोड़ों में यौन समस्याओं का व्यापक दृष्टिकोण से इलाज करते हैं, जिसमें आयुर्वेदिक चिकित्सा, परामर्श और अंतर्निहित शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कारकों को संबोधित करना शामिल है।
उनके उपचार के प्रमुख पहलू निम्नलिखित है:
- आयुर्वेदिक और हर्बल उपचार: डॉ. दुबे 100% शुद्ध, प्रभावी और चिकित्सकीय रूप से सिद्ध हर्बल उपचारों का उपयोग करते हैं। इनमें आयुर्वेदिक भस्म, गोलियाँ, तेल और चूर्ण शामिल हैं।
- समग्र दृष्टिकोण: उनके उपचार आयुर्वेद के समग्र सिद्धांतों पर आधारित होता हैं, जो रोगी के समग्र स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हैं। वे प्रत्येक व्यक्ति के लिए व्यक्तिगत उपचार प्रदान करते हैं।
- मूल कारणों पर ध्यान: उनका उद्देश्य किसी भी यौन समस्या के मूल कारण की पहचान करना और उसका उपचार करना होता है, जो उनके अनुसार शारीरिक, मनोवैज्ञानिक या जीवनशैली से संबंधित हो सकती है। उदाहरण के लिए, उन्होंने शीघ्रपतन और स्तंभन दोष जैसी समस्याओं पर शोध किया है और पाया है कि ये अवसाद, चिंता या शारीरिक कारकों के कारण होते हैं।
- युगल चिकित्सा: डॉ. दुबे युगल चिकित्सा की विशेषाधिकार प्रदान करते हैं, जिसे मनो-यौन चिकित्सा या कपल थेरेपी भी कहा जाता है, ताकि साथी यौन समस्याओं का समाधान कर सकें और अंतरंगता में सुधार कर सकें। इस प्रकार के परामर्श दृष्टिकोण का उद्देश्य जोड़ों को भावनात्मक जुड़ाव की कमी, खराब संचार या अलग-अलग यौन प्राथमिकताओं जैसे रिश्ते से जुड़े कारकों से निपटने में मदद करना है।
- गोपनीयता: वे अपने मरीज़ों को एक गोपनीय व तनाव-मुक्त वातावरण प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें परेशानी मुक्त चिकित्सा व परामर्श मिलता है।
- मनोवैज्ञानिक और परामर्श सेवाएँ: वे यौन स्वास्थ्य समस्याओं में योगदान देने वाले मानसिक और मनोवैज्ञानिक मुद्दों के समाधान के लिए परामर्श और मनोवैज्ञानिक परीक्षण के महत्व पर ज़ोर देते हैं। वे अपने मरीज़ों को यौन शिक्षा भी विशेष ध्यान देते हैं।
डॉ. सुनील दुबे (दुबे क्लिनिक):
दुबे क्लिनिक भारत का एक अग्रणी और चिकित्सकीय रूप से पंजीकृत आयुर्वेद एवं यौन चिकित्सा विज्ञान क्लिनिक है, जो लंगर टोली, चौराहा, पटना-04 में स्थित है। डॉ. सुनील दुबे और उनके विशेषज्ञ आयुर्वेदिक चिकित्सक तथा यौन चिकित्सा विशेषज्ञ इस क्लिनिक में काम करते हैं और उन सभी लोगों की मदद करते हैं जो अपनी यौन समस्याओं से जूझ रहे हैं। उपचार में, वे आधुनिक और पारंपरिक दोनों प्रकार की चिकित्सा प्रणालियों का संयोजन का उपयोग करते हैं जो रोगियों के लिए सुरक्षित, प्रभावी और पूर्णतः विश्वसनीय होता हैं। भारत के विभिन्न स्थानों से लोग दुबे क्लिनिक से जुड़ते हैं और प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग उनसे उचित परामर्श लेने के लिए इस क्लिनिक में आते हैं।
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डॉ. सुनील दुबे (दुबे क्लिनिक)
भारत का प्रमाणित आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी चिकित्सा विज्ञान क्लिनिक
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