Orgasmic Dysfunction Best Sexologist Patna Bihar Dr Sunil Dubey

Get Solution of Orgasmic Dysfunction: Best Sexologist in Patna, Bihar India: Dr. Sunil Dubey 

नमस्कार दोस्तों, दुबे क्लिनिक में आपका स्वागत है, हमेशा की भांति इस बार भी आपसे मिलकर ख़ुशी हुई। आज के इस सत्र में, हम फिर एक बार नये विषय के साथ आपके साथ हाजिर है, आज का यह विषय यौन संभोग विकार से संबंधित है। मूल रूप से देखा जाय तो यह यौन क्रिया व इसके प्रतिक्रिया का तीसरा चक्र है जिससे पुरुष व महिला दोनों अपने यौन जीवन में इस समस्या से जूझते है। सेक्सोलोजी के टर्म में, यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति की यौन इच्छा और उत्तेजना उसके जीवन में परस्पर मात्रा में होती है, परन्तु वह अपने यौन क्रिया में चरमसीमा (संभोग सुख) से वंचित रह जाता है।

यौन संभोग विकार क्या है?

विश्व प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुनील दुबे, जो पुरुष और महिला में होने वाले गुप्त व यौन समस्याओं के उपचार के विशेषज्ञ व डॉक्टर हैं, कहते हैं कि यौन संभोग विकार, जिसे सेक्सोलोजी मेडिकल साइंस के भाषा में, एनोर्गैज़्मिया या ऑर्गैज़्मिक डिसफंक्शन के रूप में जाना जाता है, यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को पर्याप्त यौन इच्छा और उत्तेजना के बाद भी संभोग सुख प्राप्त करने में लगातार या बार-बार कठिनाई, देरी या अनुपस्थिति का सामना करना पड़ता है। वैसे तो, यह यौन समस्या पुरुषों और महिलाओं किसी के भी जीवन में हो सकता है जो उनके लिए परेशानी या पारस्परिक कठिनाइयों का कारण बनता है। इस विकार से पीड़ित व्यक्ति को उनके यौन क्रिया में न तो संतुष्टि मिलती है और नहीं मानसिक शांति। वास्तव में, यह यौन विकार का तीसरा चरण होता है जो उनके संकल्प से पहले की घटना है। भारत में, इस तरह के गुप्त व यौन रोगियों की संख्या आज के समय में बढ़ती जा रही है।

यौन संभोग विकार होने के मुख्य पहलुओं का विवरण:

डॉ. सुनील दुबे, जो पटना के सबसे अच्छे सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर में से एक हैं, का मानना है कि किसी भी व्यक्ति में इस यौन संभोग विकार के कई कारक हो सकते हैं। उन्होंने इस यौन समस्या पर अपना सफल शोध भी किया है साथ-ही, वे दुबे क्लिनिक में सभी प्रकार के गुप्त व यौन रोगियों को अपना व्यापक आयुर्वेदिक चिकित्सा व उपचार भी प्रदान करते हैं। अपने उपचार, शोध और अनुभव के आधार पर; वे आगे बताते हैं कि किसी व्यक्ति में इस यौन संभोग विकार के निम्नलिखित पहलू हो सकते हैं, जो निम्नलिखित है:

  • व्यक्ति को संभोग में कठिनाई, देरी या अनुपस्थिति का होना: पुरुषो या महिलाओं में इस यौन समस्या का प्राथमिक पहलु सामान्य यौन उत्तेजना का अनुभव करने के बावजूद चरमोत्कर्ष तक न पहुँचने के लिए एक महत्वपूर्ण संघर्ष को दिखाता है। इस स्थिति में, व्यक्ति को संभोग तक पहुँचने में बहुत अधिक समय लगता है, कम या तीव्र संभोग का अनुभव होता है, उसे कम बार होना या बिल्कुल भी संभोग का आनंद प्राप्त न कर पाना शामिल हो सकता है।
  • व्यक्ति में पर्याप्त इच्छा और उत्तेजना होने के वावजूद: इस स्थिति में, संभोग की कमी तब भी देखी जाती है जब व्यक्ति पर्याप्त रूप से खुद को उत्तेजित महसूस करता है और उसे वह अनुभूति मिलती भी है जिसे आमतौर पर पर्याप्त यौन उत्तेजना माना जाता है। फिर भी, वह अपने संभोग सुख से वंचित रह जाता है।
  • व्यक्ति में होने वाली परेशानी या पारस्परिक समस्याएँ का होना: संभोग की कमी को विकार के रूप में वर्गीकृत करने के लिए, यह व्यक्ति को महत्वपूर्ण व्यक्तिगत संकट, हताशा की भावना, चिंता का कारण बनता है या उसके यौन संबंधों में समस्याएँ पैदा करता है। इस स्थिति में, संभोग का हमेशा न होना, जरूरी नहीं कि विकार को दर्शाता है जब तक कि यह उसके यौन जीवन में परेशानी का कारण न बनता हो।
  • अन्य कारकों के कारण होने पर: इस स्थिति में, संभोग में कठिनाई केवल किसी पदार्थ (जैसे नशीली पदार्थ या शराब) या किसी सामान्य चिकित्सा स्थिति (जब तक कि चिकित्सा स्थिति सीधे यौन कार्य को प्रभावित नहीं कर रही हो) के प्रत्यक्ष शारीरिक प्रभावों के कारण नहीं होने चाहिए।
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यौन संभोग विकार के प्रकार:

पुरुषों या महिलाओं में होने वाले इस यौन संभोग विकार को कई तरीकों से वर्गीकृत किया जा सकता है:

  • आजीवन (प्राथमिक): यह व्यक्ति (पुरुष या महिला) के जीवन में उनके सबसे पहला यौन अनुभव से ही जुड़ा होता है, जिसमे वे कभी भी अपने यौन क्रिया से संभोग सुख का अनुभव नहीं किया हो। संभोग सुख से वंचित रहने की स्थिति, व्यक्ति के जीवन में परस्पर बना रहता है।
  • अर्जित (द्वितीयक): इस अर्जित स्थिति में, व्यक्ति पहले संभोग सुख प्राप्त करने में सक्षम था, लेकिन अर्जित अवस्था के बाद से उसे अपने संभोग सुख प्राप्त करने में कठिनाइयाँ होती रही हैं। यह अर्जित स्थिति, व्यक्ति के यौन जीवन में शारीरिक व मानसिक समस्या के कारको पर निर्भर करता है।
  • सामान्यीकृत: इस स्थिति में, व्यक्ति को संभोग सुख प्राप्त करने में कठिनाई का सामना उसके सभी स्थितियों में जुड़ा होता है, चाहे उत्तेजना का प्रकार या साथी कोई भी हो।
  • परिस्थितिजन्य: इस स्थिति में, व्यक्ति को संभोग सुख प्राप्त करने में कठिनाई का सामना, केवल विशिष्ट स्थितियों में ही होता है जैसे कि कुछ विशेष प्रकार की उत्तेजना के साथ, या विशेष भागीदारों के साथ होती है।

व्यक्तियों में होने वाले यौन संभोग विकार होने के कारण:

हमारे आयुर्वेदाचार्य डॉ सुनील दुबे कहते है कि वैसे तो व्यक्तियों में होने वाले यौन संभोग विकार के कारण अक्सर जटिल होते हैं और इसमें शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों का संयोजन शामिल होता है। परन्तु, निदान के लिए, पीड़ित व्यक्ति के अन्तर्निहित स्थिति व मनोवैज्ञानिक कारको के जानने के बाद, यह निश्चित किया जा सकता है कि आखिर उसे यह समस्या क्यों होती है। चुकि, यह समस्या पुरुष व महिला किसी को भी प्रभावित कर सकते है। अतः दोनों के कारणों में समानता के साथ-साथ, कुछ अंतर भी है। चलिए दोनों के कारणों को विस्तार से समझते है।

महिलाओं में यौन संभोग विकार के संभावित कारण:

मनोवैज्ञानिक या मानसिक कारक:

  • महिलाओं के जीवन में लगातार चिंता, तनाव, और अवसाद का बने रहना।
  • महिलाओं के जीवन में अतीत में होने वाला यौन आघात।
  • यौन क्रिया के बारे में नकारात्मक भावनाएँ (अपराधबोध, शर्म) की स्थिति।
  • महिलाओं में उनके खराब शारीरिक छवि का होना व स्वाभिमान में कमी।
  • रिश्ते संबंधी समस्याएँ (अंतरंगता की कमी, संचार समस्याएँ, अनसुलझे संघर्ष)
  • महिलाओं को यौन क्रिया के बारे में सांस्कृतिक या धार्मिक मान्यताएँ की स्थिति।
  • यौन उत्तेजना और अपने शरीर में होने वाले परिवर्तन के बारे में ज्ञान की कमी।

शारीरिक कारक:

  • चिकित्सा की स्थितियाँ (जैसे, मधुमेह, मल्टीपल स्केलेरोसिस, तंत्रिका क्षति, हार्मोनल असंतुलन, थायरॉयड समस्याएँ), जो उनके यौन जीवन में परेशानी का कारण बनते है।
  • दवाएँ के दुष्प्रभाव (जैसे, कुछ अवसादरोधी, रक्तचाप की दवाएँ, एंटीहिस्टामाइन, एंटीसाइकोटिक्स), ऐसे कारक हो यौन कार्यो को बाधित करते है।
  • स्त्री-संबंधी रोग या सर्जरी या उपचार के कारण।
  • संभोग के दौरान दर्द (डिस्पेरुनिया) की स्थिति।
  • वैजिनल का सूखापन, दर्द व जलन का कारण।
  • आयु-संबंधी हार्मोनल परिवर्तन (जैसे, रजोनिवृत्ति) की स्थिति।
  • शराब और धूम्रपान (तंत्रिका तंत्र और रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं।)

परिस्थितिजन्य कारक:

  • अपर्याप्त फोरप्ले या उत्तेजना के कारण।
  • साथी की यौन कठिनाइयों (जैसे, शीघ्रपतन, स्तंभन दोष) होने पर।
  • यौन वरीयताओं के बारे में संचार का सही से समन्यवयन का न होना।
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पुरुषों में यौन संभोग विकार के संभावित कारण:

मनोवैज्ञानिक कारक:

  • लम्बे समय से बना हुआ चिंता, तनाव, अवसाद की स्थिति।
  • यौन प्रदर्शन की चिंता का सतत बने रहने पर।
  • वैवाहिक जीवन में संबंध संबंधी मुद्दे या क्लेश की स्थिति।
  • अतीत में हुए यौन आघात व अनुचित व्यवहार की स्थिति।
  • सख्त परवरिश या यौन जीवन के बारे में नकारात्मक धारणाएँ।

शारीरिक कारक:

  • चिकित्सा की स्थिति होने पर (जैसे, मधुमेह, मल्टीपल स्केलेरोसिस, रीढ़ की हड्डी की चोट, हार्मोनल असंतुलन, तंत्रिका संबंधी विकार), यौन कार्य बाधित होते है।
  • नियमित दवाएँ का सेवन (जैसे, कुछ एंटीडिप्रेसेंट, रक्तचाप की दवाएँ, एंटीसाइकोटिक्स) करने पर शरीर पर उनका दुष्प्रभाव।
  • पुरुषों में सर्जरी (जैसे, प्रोस्टेट सर्जरी, पेल्विक सर्जरी) के कारण।
  • मादक द्रव्यों का अत्यधिक सेवन (शराब, धूम्रपान, आदि) करने पर।
  • जननांग में संवेदना में कमी होने के कारण।

परिस्थितिजन्य कारक:

इस स्थिति में, व्यक्ति को विशिष्ट प्रकार की उत्तेजना पर अत्यधिक निर्भर होना पड़ता है। (उदाहरण के लिए, केवल हस्तमैथुन के माध्यम से संभोग सुख प्राप्त करने में सक्षम होना) यह यौन जीवन के साथ-साथ वैवाहिक जीवन को भी प्रभावित करता है।

यौन संभोग विकार का निदान:

आमतौर पर किसी भी समस्या का निदान, व्यक्ति में होने वाले समस्याओं के लक्षणों, यौन व्यवहार, संबंधों के इतिहास, चिकित्सा स्थितियों और दवाओं के बारे में चर्चा सहित संपूर्ण चिकित्सा और यौन इतिहास शामिल होता है। अंतर्निहित चिकित्सा स्थितियों की पहचान करने के लिए, रोगी का शारीरिक परीक्षण भी किया जाता है। इसके अलावा, मानसिक कारको के पहचान के लिए उसे यौन परमर्श व विश्लेषण की व्यवस्था भी की जाती है।

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सामान्य यौन संभोग विकार का उपचार:

डॉ सुनील दुबे बताते है कि उपचार के तरीके अंतर्निहित कारणों के आधार पर अलग-अलग होते हैं और इसमें निम्नलिखित तरीके शामिल हो सकते हैं:

  • व्यक्ति को उसके यौन क्रिया और उत्तेजना के बारे में सही शिक्षा: इसमें व्यक्ति को अपने शरीर व यौन कार्यो को समझना और यह जानना कि क्या आनंददायक है।
  • स्व-उत्तेजना (हस्तमैथुनव्यायाम: इसमें यह पहचानने में मदद मिलता है कि किस प्रकार की उत्तेजना व्यक्ति में प्रभावी है।
  • संचार कौशल का प्रशिक्षण: संचार के माध्यम से, साथी के साथ यौन ज़रूरतों और प्राथमिकताओं पर चर्चा करना सीखना।
  • यौन थेरेपी: इस थेरेपी में, यौन विकार में योगदान देने वाले मनोवैज्ञानिक और संबंध कारकों को संबोधित करना होता है।
  • मनोवैज्ञानिक उपचार: इस उपचार के माध्यम से व्यक्ति को उसके चिंता, तनाव या नकारात्मक विश्वासों को संबोधित करने के लिए संज्ञानात्मक-व्यवहार थेरेपी (सीबीटी) का व्यवहार किया जाता है।
  • चिकित्सा उपचार: गुप्त व यौन समस्या के अंतर्निहित चिकित्सा स्थितियों को संबोधित करना या यदि वे समस्या में योगदान दे रहे हैं तो उनके दवाओं को बदलना। कुछ मामलों में हार्मोन थेरेपी (जैसे, महिलाओं के लिए एस्ट्रोजन) पर विचार किया जा सकता है।
  • यौन सहायता और उपकरणों का उपयोग: यह उस समय किया जाता है जब व्यक्ति को स्वैक्षिक ही इसमें पहल करना पड़ता जैसे कि उत्तेजना बढ़ाने के लिए वाइब्रेटर।
  • पेल्विक फ़्लोर व्यायाम (केगल्स): कुछ व्यक्तियों को यौन क्रिया को बेहतर बनाने में, विशिष्ट व्यायाम मदद कर सकते हैं।

सभी व्यक्ति को यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि कभी-कभी संभोग तक पहुँचने में कठिनाई का अनुभव होना आम बात या घटना है और यह जरूरी नहीं कि यह किसी विकार की ओर संकेत देता हो। मूल रूप से, अगर इस प्रकार की समस्या हमेशा बनी रहती है, परेशानी का कारण बनती है, या रिश्तों को प्रभावित करती है, तो स्वास्थ्य सेवा पेशेवर या योग्य गुप्त व यौन रोग थेरेपिस्ट से मदद लेने की सलाह दी जाती है।

कौन सा दोष यौन संभोग विकार को प्रभावित करता है?

भारत में अग्रणी, बिहार के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. सुनील दुबे कहते हैं कि आयुर्वेद का दृष्टिकोण हमेशा व्यक्ति में होने वाले गुप्त व यौन समस्याओं के स्पष्ट कारण बताता है। जैसा कि लोगो को पता होना चाहिए कि आयुर्वेद में, तीन दोष - वात, पित्त और कफ होते है जो शरीर में विभिन्न शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कार्यों को नियंत्रित करते हैं।  जब कभी भी, शरीर में किसी भी दोष में असंतुलन होता है, तो यह संभावित रूप से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में योगदान दे सकता है, वात दोष को अक्सर यौन संभोग विकार के संबंध में सबसे महत्वपूर्ण विकार माना जाता है, खासकर पुरुषों में। चलिए जानते है कि वात दोष का असंतुलन को क्यों सभी दोषो में सबसे पहले शामिल किया जाता है:

  • वात शरीर में गति और तंत्रिका आवेगों को नियंत्रित करता है:  व्यक्ति में यौन क्रिया के लिए उत्तेजना और संभोग सहित यौन प्रतिक्रिया, उचित तंत्रिका कार्य और समन्वित मांसपेशी गति पर बहुत अधिक निर्भर करती है। आयुर्वेद के अनुसार, वात दोष शरीर में इन कार्यों के लिए जिम्मेदार कारक है। वात में असंतुलन होने से अनियमित तंत्रिका संचरण हो सकता है, जो संभोग प्राप्त करने की क्षमता को प्रभावित या विलंबित कर सकता है।
  • वात शरीर में सूखापन और कमी से जुड़ा होता है:  शरीर में वात के गुणों में सूखापन और चक्कर आना शामिल होता हैं। वात के बढ़ने से प्रजनन ऊतकों में सूखापन और महत्वपूर्ण ऊर्जा (ओजस और शुक्र धातु - वीर्य / प्रजनन ऊतक) की कमी हो सकती है, जो स्वस्थ यौन कार्य और संभोग का अनुभव करने की क्षमता के लिए आवश्यक होता हैं।
  • वात व्यक्ति के मन को प्रभावित करता है:  चिंता, तनाव और घबराहट जैसे मनोवैज्ञानिक कारक, जो अक्सर वात असंतुलन से जुड़े होते हैं, यौन उत्तेजना और संभोग तक पहुँचने की क्षमता में महत्वपूर्ण रूप से हस्तक्षेप करते हैं। यौन प्रदर्शन की चिंता संभोग संबंधी कठिनाइयों का एक आम कारण है, जो अक्सर मन को प्रभावित करने वाले बढ़े हुए वात से जुड़ी होती है।
  • वात और पुरुष में होने वाले गुप्त  यौन रोग:  हमारे शास्त्रीय आयुर्वेदिक ग्रंथ अक्सर पुरुष गुप्त व यौन रोग जैसे कि स्तंभन दोष (नपुंसकता), शीघ्रपतन और यहां तक ​​कि स्खलन में कठिनाई (जिसमें संभोग तक पहुंचना भी शामिल हो सकता है) को असंतुलन, विशेष रूप से बढ़े हुए वात दोष से ही जोड़ते हैं।

पित्त और कफ दोष की भूमिका भी इस यौन संभोग विकार के जिम्मेवार कारक होते है:

पित्त दोष के असंतुलन होने पर: व्यक्ति के शरीर में पित्त (अग्नि और परिवर्तन सिद्धांत) में असंतुलन होने से उनकी तीव्र इच्छाएँ हो सकती हैं, लेकिन साथ ही चिड़चिड़ापन, हताशा और संभावित रूप से शीघ्रपतन या जलन का कारण भी बन सकती है जो आनंद और संभोग में बाधा डालते है।

कफ दोष के असंतुलन होने पर: व्यक्ति के शरीर में कफ स्थिरता और चिकनाई प्रदान करने का कार्य करता है, इसके असंतुलन होने पर यह सुस्ती, कम कामेच्छा और उत्तेजना या प्रेरणा की कमी के कारण संभावित रूप से देरी या कठिन संभोग का कारण बन सकता है।

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निष्कर्ष:

डॉ सुनील दुबे कहते है, उपयुक्त कारणों से हम समझ चुके है कि वात दोष असंतुलन को अक्सर यौन संभोग विकार को प्रभावित करने वाला एक प्राथमिक कारक क्यों माना जाता है, विशेष रूप से पुरुषों में तंत्रिका कार्य, गति और मनोवैज्ञानिक कल्याण पर इसके प्रभाव के कारण, अन्य दोष (पित्त और कफ) भी व्यक्ति के संविधान और असंतुलन की विशिष्ट प्रकृति के आधार पर योगदान कर सकते हैं। यह व्यक्ति के अन्तर्निहित कारक व मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है।

यौन संभोग विकार के लिए आयुर्वेदिक उपचार में आम तौर पर आहार और जीवनशैली समायोजन, हर्बल उपचार और समग्र संतुलन को बहाल करने और स्वस्थ यौन कार्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उपचार के माध्यम से किसी व्यक्ति में पहचाने गए विशिष्ट दोषिक असंतुलन को संबोधित करना शामिल होता है। अतः व्यक्ति को अपने व्यक्तिगत निदान और उपचार योजना के लिए एक अनुभवी आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर से परामर्श करना मुख्य कार्य है।

आयुर्वेद चिकित्सा व उपचार के माध्यम से यौन संभोग विकार से कैसे निपटें:

किसी भी गुप्त व यौन समस्या के निदान के लिए, वास्तव में आयुर्वेदिक चिकित्सा व उपचार सबसे सफल व सुरक्षित उपचार योजना है। डॉ. सुनील दुबे बताते है कि आयुर्वेद के माध्यम से यौन संभोग विकार से निपटने में एक समग्र दृष्टिकोण शामिल होता है जो व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक भलाई को संबोधित करता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा व उपचार से कोई व्यक्ति अपने समस्त गुप्त व यौन समस्या से कैसे निपट सकता है, इसका विवरण निम्नलिखित है:

समस्या के अंतर्निहित दोष  असंतुलन की पहचान करना:

एक अनुभवी आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजिस्ट रोगी की प्रकृति और किसी भी मौजूदा विकृति का आकलन करके यह निर्धारित करते है कि कौन से दोष मुख्य रूप से उसके व्यक्तिगत समस्या के लिए जिम्मेवार हैं। जैसा कि पहले ही उल्लेख किया जा चुका है, वात दोष अक्सर समस्या के लिए महत्वपूर्ण कारक होता है, लेकिन पित्त और कफ असंतुलन भी योगदान दे सकते हैं। वे विशिष्ट दोष असंतुलन को समझ कर रोगी के उपचार योजना को तैयार करने में मदद करते है।

दैनिक आहार और जीवनशैली में बदलाव  समायोजन:

वात के संतुलन के लिए आहार:

यदि व्यक्ति के शरीर में वात बढ़ जाता है, तो यह ध्यान देने वाली बात है कि गर्म, नम और जमीन को छूने वाले खाद्य पदार्थ का सेवन लाभकारी होता है। इसमें शामिल हैं:

  • गर्म दूध (इलायची या जायफल जैसे मसालों के साथ) फायदेमंद होता है।
  • घी और स्वस्थ प्राकृतिक तेल श्रेयकर होता है।
  • चावल और गेहूं जैसे पके हुए अनाज का सेवन लाभकारी है।
  • मीठे और खट्टे फल का सेवन।
  • जड़ वाली सब्जियाँ का सेवन।
  • ठंडे, सूखे और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के सेवन से बचे व परहेज़ करें।
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पित्त संतुलन के लिए आहार:

यदि शरीर में पित्त अधिक हो गया है, तो ठंडा और शांत करने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन फायदेमंद होता है।

  • मीठा और कड़वा स्वाद वाले प्राकृतिक पदार्थो का सेवन।
  • ठंडा पेय (लस्सी, नारियल पानी) का सेवन।
  • ताजे फल और सब्जियाँ का सेवन।
  • ध्यान दे - मसालेदार, तैलीय और किण्वित खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज़ करें।

कफ संतुलन के लिए आहार:

यदि शरीर में कफ प्रबल हो जाये, तो हल्के, गर्म और सूखे खाद्य पदार्थों को प्रोत्साहित किया जाता है:

  • तीखा, कड़वा और कसैला स्वाद वाले प्राकृतिक पदार्थो का सेवन श्रेयकर होता है।
  • पकी हुई सब्जियाँ का सेवन फायदेमंद होता है।
  • दाल और फलियाँ का सेवन बढ़िया है।
  • ध्यान दे- भारी, तैलीय और मीठे खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज़ करें।

जीवनशैली कारक:

  • नियमित रूप से संतुलित भोजन: व्यक्ति को उनके एक सुसंगत खाने का शेड्यूल बनाए रखने से सभी दोषों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीना: यौन स्वास्थ्य सहित संपूर्ण शारीरिक कार्यों के लिए उचित मात्रा में पानी पीना आवश्यक है।
  • पर्याप्त  गुणवत्तपूर्ण नींद: शरीर और मन को तरोताजा करने के लिए 7-8 घंटे की अच्छी नींद लेने का लक्ष्य रखें। यह हॉर्मोन को भी संतुलित रखते है।
  • तनाव का प्रबंधन: व्यक्ति को योग, ध्यान, गहरी साँस लेने के व्यायाम (प्राणायाम) और प्रकृति में समय बिताने जैसे अभ्यास मन को संतुलित करने और तनाव को कम करने में मदद करते हैं, जो यौन रोग का एक महत्वपूर्ण कारक होता है।
  • नियमित व्यायाम: हल्का से लेकर मध्यम व्यायाम शरीर में रक्त संचार और समग्र ऊर्जा स्तर में सुधार करता है। यदि वात असंतुलित है तो अत्यधिक या ज़ोरदार व्यायाम से बचना चाहिए।
  • अभ्यंग (तेल मालिश): व्यक्ति को गर्म, दोष-विशिष्ट तेलों (जैसे वात के लिए तिल का तेल, पित्त के लिए नारियल का तेल, या कफ के लिए सरसों का तेल) से नियमित रूप से स्वयं की मालिश करने से तंत्रिका तंत्र शांत होता है, रक्त संचार में सुधार होता है और आराम को बढ़ावा मिलता है।

हर्बल उपचार (वाजीकरण थेरेपी):

विश्व-प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ सुनील दुबे बताते है कि आयुर्वेद में वाजीकरण चिकित्सा नामक एक विशेष शाखा है, जो यौन स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता और जीवन शक्ति को बढ़ाने व सुदृढ़ करने पर अपना केंद्रित करता है। व्यक्ति में होने वाले इस यौन संभोग विकार के अंतर्निहित कारणों को दूर करने के लिए विशिष्ट जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है। कुछ सामान्य रूप से इस्तेमाल की जाने वाली जड़ी-बूटियाँ निम्नलिखित हैं:

  • अश्वगंधा: यह एक एडाप्टोजेन नामक जड़ी-बूटी है जो शरीर में हो रहे तनाव को कम करने, ऊर्जा के स्तर को बेहतर बनाने और पुरुषों व महिलाओं दोनों में कामेच्छा और यौन कार्य को बढ़ाने में मदद करता है।
  • शतावरी: मुख्य रूप से इस जड़ी-बूटी को महिला के लिए टॉनिक के रूप में जाना जाता है, यह हार्मोन को संतुलित करने, कामेच्छा में सुधार करने और वैजिनल के सूखेपन जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। यह प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार करके पुरुषों को भी लाभ पहुंचाने में मदद करता है।
  • गोक्षुरा: इस जड़ी-बूटी का उपयोग व्यक्ति के टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाने, कामेच्छा में सुधार करने और पुरुषों में स्तंभन कार्य को बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह महिलाओं की यौन इच्छा और उत्तेजना के लिए भी फायदेमंद होता है।
  • सफ़ेद मूसली: यह एक कामोद्दीपक वाली जड़ी-बूटी है जो पुरुषो में शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता और समग्र यौन सहनशक्ति में सुधार करने में मदद करता है। इसका उपयोग सामान्य कमज़ोरी के लिए भी किया जाता है।
  • कपिकाचू: वैसे तो इस जड़ी-बूटी में एल-डीओपीए होता है, जो व्यक्ति के मूड, कामेच्छा और यौन प्रदर्शन में सुधार करने में मदद करता है।
  • शिलाजीत: यह एक खनिज युक्त राल है जो ऊर्जा, सहनशक्ति और समग्र जीवन शक्ति को बढ़ाता देता है, अप्रत्यक्ष रूप से यह यौन स्वास्थ्य का समर्थन करता है।
  • इला (इलायची), लवंगा (लौंग), और केसर: इन मसालों का उपयोग अक्सर शरीर में रक्त संचार और यौन इच्छा को बढ़ाने के लिए कम मात्रा में किया जाता है।

उपयुक्त सभी जड़ी-बूटियों को आम तौर पर आयुर्वेदिक चिकित्सक व सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर द्वारा व्यक्ति के दोष असंतुलन और विशिष्ट लक्षणों पर विचार करते हुए विशिष्ट योगों में निर्धारित करते है।

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आयुर्वेदिक उपचार (पंचकर्म):

डॉ. सुनील दुबे आगे बताते है कि आयुर्वेद में पाँच विषहरण उपचार, पंचकर्म, शरीर से संचित विषाक्त पदार्थों (अमा) को निकालने और दोषों को संतुलित करने के लिए व्यक्ति को सुझाव दिया जा सकता हैं। बस्ती (एनीमा थेरेपी), विरेचन (शुद्धिकरण) और नस्य (औषधीय तेलों का नाक में टपकाना) जैसी विशिष्ट चिकित्साएँ व्यक्ति की शारीरिक संरचना और असंतुलन के आधार पर लाभकारी हो सकती हैं। मूल रूप से, किसी भी उपचार की योजना, व्यक्ति के समस्या की प्रकृति व उनके अन्तर्निहित चिकित्सा स्थितियों को देखते हुए की जाती है।

मनोवैज्ञानिक कारकों पर ध्यान देना:

आयुर्वेद यौन स्वास्थ्य में मन और शरीर के बीच मजबूत संबंध को पहचानता है। तनाव, चिंता, अवसाद और अतीत के आघात जैसे मनोवैज्ञानिक कारकों को संबोधित करना, व्यक्तिगत उपचार के लिए महत्वपूर्ण है। अतः, यहाँ आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजिस्ट निम्नलिखित पहलुओं की सिफारिश रोगी को कर सकते है।

  • योग और ध्यान: व्यक्ति के मन को शांत करने और चिंता को कम करने के लिए।
  • यौन परामर्श: अंतर्निहित भावनात्मक मुद्दों को संबोधित करने के लिए।
  • माइंडफुलनेस अभ्यास: वर्तमान क्षण की जागरूकता बढ़ाने और प्रदर्शन की चिंता को कम करने के लिए।

व्यक्ति को निम्नलिखित बातों पर महत्वपूर्ण विचार करने की आवश्यकता होती है:

  • व्यक्तिगत उपचार: आयुर्वेदिक उपचार अत्यधिक व्यक्तिगत तौर पर आधारित होता है। चुकी, एक व्यक्ति के लिए जो कारगर है, वह दूसरे के लिए कारगर नहीं हो सकता है। अतः सटीक निदान और एक अनुकूलित उपचार योजना के लिए एक योग्य व अनुभवी आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक होता है।
  • उपचार के दौरान धैर्य और निरंतरता: आम तौर पर, आयुर्वेदिक उपचारों को अपना प्रभाव दिखाने में अक्सर समय लगता है। आहार और जीवनशैली में बदलाव के साथ-साथ हर्बल उपचारों में निरंतरता महत्वपूर्ण होता है।
  • आधुनिक चिकित्सा के साथ एकीकरण: यदि यौन संभोग विकार का कोई स्पष्ट चिकित्सा कारण है, तो पारंपरिक चिकित्सा उपचार के साथ आयुर्वेदिक दृष्टिकोणों को एकीकृत करना आवश्यक हो सकता है। अतः अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को हमेशा किसी भी पूरक उपचार के बारे में सूचित करें जिसका आप उपयोग पहले से कर रहे हैं।
  • समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान देना: आयुर्वेद का मूल दृष्टिकोण समग्र संतुलन और स्वास्थ्य को बहाल करने पर जोर देता है, जो बदले में यौन स्वास्थ्य को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

दोष असंतुलन के मूल कारणों को संबोधित करके, उचित आहार और जीवनशैली में बदलाव करके, शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का उपयोग करके और मनोवैज्ञानिक कारकों का प्रबंधन करके, आयुर्वेद यौन संभोग विकार से निपटने के लिए एक व्यापक और प्राकृतिक दृष्टिकोण प्रदान करता है।


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डॉ. सुनील दुबे, विश्व प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य और सीनियर सेक्सोलॉजिस्ट

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आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी पेशे में 35 वर्षों का अनुभव

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!!!हेल्पलाइन/व्हाट्सप्प: +91-98350-92586!!!

वेन्यू: दुबे मार्केट, लंगर टोली, चौराहा, पटना-04

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